Saturday, May 16, 2015

75 आज पशुओं का अलग

आज पशुओं का अलग, दरवार होना चाहिए
कुछ हमारे पास भी, अधिकार होना चाहिए॥
 
लोमड़ी आगे बढ़ी, बढ़कर के ये कहने लगी,
हमको अब इंसान सा, हुशियार होना चाहिए॥
 
बूढ़े कुत्ते ने कहा, हम सब तजुर्बेदार हैं,
हम सभी के ज्ञान का, उपयोग होना चाहिए॥
 
अपने इस दरवार में, रखने हैं काबिल मंत्री,
हर किसी की अक्ल का, प्रयोग होना चाहिए॥
 
कौन है किस जाति का, कैसी हैं किसकी आदतें,
क्षेत्र का आवंटन भी, तदरूप होना चाहिए ॥
 
जाति से जो भैंसा निकले, चारा मंत्री वो बने,
भौंकने वाला हमारा, मंत्री होना चाहिए॥
 
और इस भूरे गधे को, ढो रहा जो अपना बोझ,
ऐसे लायक को तो गर्दभ, क्षेत्र मिलना चाहिए॥
 
तालियां लय में बजाना, जानता हो सिर्फ जो,
ऐसे काबिल को तो, हिजड़ा मंत्री होना चाहिए॥
 
तीन पुश्तें जिसकी गुजरीं, रंडियों के द्वार पर,
ऐसे को कोठा-वजीरे, यार होना चाहिए॥
 
पिस्तौलों की नोंक पर जो, पास बिल करवा सके,
उसको गुंडा मॉफियों का, मंत्री होना चाहिए॥
 
गाली दे, माइक उखाड़े, फाड़ दे जो फाइलें,
उसको इस दरवार का, प्रधान होना चाहिए॥
 
इन गुणों से हीन निकले, उसके हित में है यही,
छोड़कर अपनी जगह, घर लौट जाना चाहिए॥

रणवीर सिंह (अनुपम), मैनपुरी (उप्र)
              *****

No comments:

Post a Comment

Note: Only a member of this blog may post a comment.