ख्वाब में सोचा न था, कि वह इधर आ जाएगा,
दो मुलाकातों में दिल को, इस कदर भा जाएगा॥
यह नहीं मालूम था कि, चाहता वो इस तरह,
धूप में बदली का साया, बनके वो छा जाएगा॥
ताजगी चेहरे पे, आँखों में चमक, लब पर तब्बसुम,
मरनेवाला देख ले तो, जिंदगी पा जाएगा॥
गुलबदन, गर्दन सुराही, दूधिया पत्थर का बुत,
देखकर कुछ भी न देखे, देखता रह जाएगा॥
कौन सा जादू है जो, उनको दिवाना कर सके,
एक, दो, दस, बीस क्या, लाखों पे वो छा जाएगा॥
है नहीं दुनियाँ में जो, रुतबे को उनके कम करे,
इक दफा देखेगा तो, कदमों पे सिर आ जाएगा॥
क्या उसे पागल करेगा, यह प्याला जाम का,
गर पड़े उनकी नजर, मदहोश खुद हो जाएगा॥
दिल भी ऐसी चीज है, खुद रास्ता लेता बना,
आना होता है जहाँ पर, यह वहीं आ जाएगा॥
सिर्फ मेरी सादगी पर, छोड़कर हर चीज को,
क्या पता था एक दिन वो, घर मेरे आ जाएगा॥
रणवीर सिंह (अनुपम), मैनपुरी (उप्र)
*****
No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.