ज़माने को जरा समझो, तुम्हारा बाप लगता हूँ।
अनाड़ी मत हमें समझो, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
अनाड़ी मत हमें समझो, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
जो ठोकर खाई हैं हमने, वो तुमको भी न लग जाये,
तजुर्बों को बताता हूँ, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
तजुर्बों को बताता हूँ, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
हमें मालूम इज्जत क्या? औ इसका ओहदा है क्या?
बचाकर के इसे रखिये, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
जिसे तुम चाहते पाना, न पीछे भागिए उसके,
वो उतना और भागेगा, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
वो उतना और भागेगा, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
बनो खुद्दार और खुद में, करो खुद्दारियां पैदा,
हुश्न खुद घर पे आएगा, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
हुश्न खुद घर पे आएगा, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
ये लोधी गार्डन देखा, वो बुद्धा गार्डन देखा,
वहाँ क्या-क्या न देखा है, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
वहाँ क्या-क्या न देखा है, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
वहाँ नगों को देखा है, खुले अंगों को देखा है,
गिरा इन्सान देखा है, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
गिरा इन्सान देखा है, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
हमीं से सीखकर पश्चिम, हमें क्या-क्या सिखाता है,
अजी क्या सीखना उससे, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
अजी क्या सीखना उससे, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
जो पश्चिम अब सिखाता है, वो सीखा है युगों पहले,
चलो चलते हैं खजुराहो, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
चलो चलते हैं खजुराहो, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
ज़माने में भी रह करके, ज़माने में न तुम रहना,
असल है जिंदगी ये ही, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
असल है जिंदगी ये ही, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
जो कहता हूँ, वो करता हूँ, जो बोला है, निभाया है,
यही है ज़िन्दगी मेरी, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
कहीं पर जा के तुम बैठो, कहीं पर जा के तुम ढूँढो,
न मुझसा देख पाओगे, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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न मुझसा देख पाओगे, तुम्हारा बाप लगता हूँ।।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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