ज्यों आसमां को छोड़कर, सागर में उतरी हो परी।
जल में किसी ने दी बिठा, मूरत कोई संगमरमरी।
निज अंक में ले हंस को, चादर लपेटे नीर की।
लहरों के संग अठखेलियाँ, करती हुई कोई जलपरी।
जल में किसी ने दी बिठा, मूरत कोई संगमरमरी।
निज अंक में ले हंस को, चादर लपेटे नीर की।
लहरों के संग अठखेलियाँ, करती हुई कोई जलपरी।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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