Monday, April 27, 2015

33 ज्यों आसमां को छोड़कर

ज्यों आसमां  को छोड़कर, सागर में  उतरी  हो परी।
जल में  किसी ने  दी बिठा,  मूरत  कोई  संगमरमरी।
निज  अंक  में ले  हंस  को,  चादर  लपेटे  नीर  की।
लहरों के संग अठखेलियाँ, करती हुई कोई जलपरी।

रणवीर सिंह (अनुपम)
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