Monday, April 27, 2015

15 सभी मदमस्त बौराये हुए वाचाल

सभी मदमस्त, बौराये, हुए वाचाल होली में,
रंगा है ब्रज, रंगी मथुरा, रंगा भोपाल होली में।।
 
अनोखा पर्व है होली, अनोखी मस्तियाँ इसकी,
कुलाँचे भर रहे बुड्ढे, बदल गई चाल होली में।।
 
चढ़ी है भांग इस तरह, कोई हँसता, कोई रोये,
गजब के कर रहे करतब, अजब है हाल होली में।।
 
कोई तस्वीर को चूमें, कोई चूमें दुपट्टे को,
कोई है चूमता फिरता, लिए रूमाल होली में।।
 
लगाकर कुल्लिया 'घीसू' में, आया हौंसला इतना,
जरा सी बात पर 'गामा' से, ठोंके ताल होली में।।
 
तेरा प्रेमी दिखे है जो, वो कल तक दूसरे का था,
तू काहे पालती इस जान का, जंजाल होली में।।
 
सँभल जा होश में आजा, तेरा उपभोग करके ये,
ये अगले साल ढूँढेगा, नया फिर माल होली में।।
 
उलझ मत सालियों से तू, ये ऐसा हाल कर देंगी,
तू जाना छोड़ देगा फिर, अरे ससुराल होली में।।
 
पड़ी बौछार गोरी के, गुलाबी गाल के ऊपर,
लिया है रोक घूँघट से, बनाकर ढाल होली में।।
 
बहाना मिल गया उसको, तो कितना गिर गया देखो,
रंगों के नाम पर गोरी के, नोंचे गाल होली में।।
 
जहाँ उसका किया है दिल, उसी स्थान को है रगड़ा,
न छोड़ी एक भी जगह, किया न ख्याल होली में।।
 
कोई काली, कोई पीली, कोई नीली बना डाली,
किसी श्यामल सलौनी को, किया है लाल होली में।।
 
वो रंग से तर-बतर होकर, सिमटकर देह में अपनी,
लगे खजुराहो की मूरत, हुई बेहाल होली में।।
 
ये फागुन किस तरह उनमें, नशीला जोश भर सकता,
जिन्हें रोटी नहीँ सूखी, जिन्हें न दाल होली में।।
 
मनाएं किस तरह होली, अरे  इस देश में 'अनुपम',
जहाँ भूखे, जहाँ नंगे, फिरें कंगाल होली में।।
 
अगर जल्दी न सुलझा ये, गरीबी, भूख का मसला,
उठेगा जलजला हर ओर, और भूचाल होली में।।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
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