रोज बाबा साहब का हम ध्यान करें, मिल के रहें,
और हर इंसान से पहिचान करें, मिल के रहें।
पतित, दलितों के लिए, बेखौप जो लड़ता रहा,
क्यों उस बलबान का, सम्मान करें, मिल के रहें।
जो अकेला लिख गया है, देश के संविधान को,
क्यों न ऐसे शख्स पर अभिमान करें, मिल के रहें।
जिसने नर और नारियों को, हक़ दिया है एक सा,
क्यों न उस विद्वान का गुणगान करें, मिल के रहें।
'ज्ञान का प्रतीक' जिसको विश्व सारा कह रहा,
क्यों न गर्वित हिन्द हो, जयगान करें, मिल के रहें।
साथियो लख दुर्दशा को, चल रहे षड्यंत्र को,
आने वाले वक्त का भी भान करें, मिल के रहें।
सोचिये, उठिये, समझिये, आज के इस दौर में,
किस तरह आगे बढ़ें, उत्थान करें, मिल के रहें।
योग्यता दासी नहीं हैं, जाति की और धर्म की,
हम सभी इस सोच को बलवान करें, मिल के रहें।
किस तरह यह हिंद, सारे विश्व का शिरमौर हो,
आज से जनजागरण, अभियान करें मिल के रहें।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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