गीतिका छंद-2122 2122 2122 212
मनचलों को देखकर तू, मुस्कराना छोड़ दे।
ऐरे-गैरे हर किसी से, दिल लगाना छोड़ दे।।
ऐरे-गैरे हर किसी से, दिल लगाना छोड़ दे।।
कुछ नहीं तुझको मिलेगा, फक्कड़ों की प्रीत से,
हर किसी से राह में, आँखे लड़ाना छोड़ दे।।
हर किसी से राह में, आँखे लड़ाना छोड़ दे।।
तन ते'रा अँगड़ाइयाँ, लेने लगा है आजकल,
अब तो' बच्चों की तरह, लड़ना-लड़ाना छोड़ दे।।
अब तो' बच्चों की तरह, लड़ना-लड़ाना छोड़ दे।।
हो गई अठरा वर्ष की, यों उठा-बैठा न कर,
है तकाजा उम्र का, मिलना-मिलाना छोड़ दे।।
है तकाजा उम्र का, मिलना-मिलाना छोड़ दे।।
इस तवस्सुम, इस हँसी पर, जान जाती है निकल,
इस तरह हर बात पर, तू खिलखिलाना छोड़ दे।।
इस तरह हर बात पर, तू खिलखिलाना छोड़ दे।।
देखकर रंग-रूप तेरा, है पड़ोसन जल रही,
सज-सँवरकर और उसको, तू जलाना छोड़ दे।।
सज-सँवरकर और उसको, तू जलाना छोड़ दे।।
तू जिसे चाहे उसे फिर, फिक्र है किस बात की,
क्या मुहल्ला, क्या गली, वो तो जमाना छोड़ दे।।
क्या मुहल्ला, क्या गली, वो तो जमाना छोड़ दे।।
बावले होकर के कितने, मिट गए इस हुश्न पर,
इस तरह इन आशिको को, तू मिटाना छोड़ दे।।
इस तरह इन आशिको को, तू मिटाना छोड़ दे।।
आ गए अपनी गली में, घर भी ज्यादा दूर ना,
चल सँभलकर यार अब तू, लड़खड़ाना छोड़ दे।।
चल सँभलकर यार अब तू, लड़खड़ाना छोड़ दे।।
तू मिली जब से मुझे, दुश्मन हजारों बन गए,
नित नए इस जान के, दुश्मन बनाना छोड़ दे।।
नित नए इस जान के, दुश्मन बनाना छोड़ दे।।
आज तक समझा नहीं कि, चाहती है तू क्या,
छोटी'-छोटी बात पर तू, आजमाना छोड़ दे।।
छोटी'-छोटी बात पर तू, आजमाना छोड़ दे।।
तेरी' वाचाली से रातों, में खखल पड़ने लगा,
कम से कम तू नींद में तो, बड़बड़ाना छोड़ दे।।
कम से कम तू नींद में तो, बड़बड़ाना छोड़ दे।।
महफ़िलों में आपके जो, आज तक जलता रहा,
दिलजले आशिक का अब तू, दिल जलाना छोड़ दे।।
दिलजले आशिक का अब तू, दिल जलाना छोड़ दे।।
क्या मिला 'अनुपम' तुझे, साकी से नाता जोड़कर,
वक्त है अब भी अरे, पीना-पिलाना छोड़ दे।।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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वक्त है अब भी अरे, पीना-पिलाना छोड़ दे।।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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