Monday, April 27, 2015

23 जीवन में बाँध लाती हैं

जीवन में जब भी आतीं, बनकर के हीर ये।
आँचल में बाँध लातीं हैं, शीतल समीर ये॥
 
चुपचाप हर दुःख दर्द को, खुद में समेट लें,
सब कुछ खुशी से सह ले, नाजुक शरीर ये॥
 
मौका पड़े तो ये किसी पे' चूकतीं नहीं,
छाती के भीतर जा घुसें, ऐसा हैं तीर ये॥

ये हिन्द की हैं नारियाँ, सचमुच की शेरनी,
गेहूँ के माफिक देह में, कर दें लकीर ये॥
 
सौहर पे आँच आये, फिर देखिये इन्हें,
यमराज भी हो सामने, डालेंगी चीर ये॥
 
कामुक नजर से देख मत, पत्नी पराइ को,
ये जहर है, तू मत समझ, खाने की खीर ये॥

मैं तो कहूँगा चार के चक्कर में तू न पड़,
एक ही बना के छोड़ेगी, तुझको फकीर ये॥
 
इनके मुकाबिले में, दुनियाँ में कौन है?
अनुपम हैं, बेमिसाल हैं, हैं बेनजीर ये..
रणवीर सिंह (अनुपम)
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