Tuesday, January 08, 2019

680. पंकज मुख रक्तिम अधर (कुंडलिया)

680. पंकज मुख रक्तिम अधर (कुंडलिया)

पंकज  मुख  रक्तिम अधर, गौरवर्ण  यह देह।
श्याम  चक्षु  श्यामल लटें, नैनन  छलके  नेह।
नैनन   छलके   नेह, हिया  ले   रहा   हिलोरें।
कामिन समझ न पाय, कौन विधि बाँधें-छोरें।
रसिक बावले  फिरें, लूटने को  अनुपम सुख।
सृष्टि  दिखे  बेचैन, देखकर यह  पकंज मुख।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
08.01.2019
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