मनहरण घनाक्षरी
आली संग झूल रही, गोरी मन फूल रही,
अमुआ की डाल देखो, लच-लच जात है।
सावन की घट छाई, तन लेत अँगड़ाई,
दिल कहे पिया-पिया, फूली न समात है।
सखि से कहे है गोरी, तू न जाने गति मोरी,
बस में बहन नहीं, मेरो आज गात है।
जल की फुहार आली, करे मोय मतवाली,
तन में हमारे आज, आग कूँ लगात है।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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आली-सखी; मोय-मुझे; गात-शरीर; कूँ-को
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