485. हम अब्बल हैं तुम दोयम हो (मुक्तक)
हम अब्बल हैं, तुम दोयम हो, हम कहते वो ही राष्ट्रवाद।
हमरे, कुकर्म, आडंबर पर, काहे को इतना है विवाद।
हम ऊँच-नीच, हम छुआछूत, हम जातिवाद के परिचायक।
हम इसी सोच के संरक्षक, ये ही तो हमरा बीज-खाद।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
13.01.2018
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