Sunday, January 14, 2018

485. हम अब्बल हैं तुम दोयम हो (मुक्तक)

485. हम अब्बल हैं तुम दोयम हो (मुक्तक)

हम अब्बल हैं, तुम दोयम हो, हम कहते  वो  ही राष्ट्रवाद।
हमरे,  कुकर्म, आडंबर  पर, काहे  को  इतना  है  विवाद।
हम  ऊँच-नीच, हम  छुआछूत, हम जातिवाद के परिचायक।
हम  इसी  सोच  के  संरक्षक,  ये  ही   तो  हमरा  बीज-खाद।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
13.01.2018
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