484. नमन तथागत आपको (कुण्डलिया)
नमन तथागत आपको, ज्ञानमयी हे बुद्ध।
अंतर को पावन करो, मन को कर दो शुद्ध।
मन को कर दो शुद्ध, दूर दुर्बलता करिये।
ज्ञान चक्षु दो खोल, हृदय से तम को हरिये।
तन-मन से हे नाथ, हम सभी हैं शरणागत।
विनत भाव से करें आपको नमन तथागत।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
12.01.2018
*****
No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.