Sunday, December 17, 2017

468. जब से तुमने है गहा (कुण्डलिया)

468. जब से तुमने है गहा (कुण्डलिया)

जब  से  तुमने  है  गहा,  निज  हाथों  से हाथ।
कीकर, पीपल  हो गया, पाकर  तुम्हरा  साथ।
पाकर  तुम्हरा  साथ,  हुआ  पीतल  से  सोना।
उपवन सा खिल गया, हृदय का  कोना-कोना।
सीधा चलने  लगा, बैल यह  पथ  पर  तब से।
पकड़ा  तुमने  हाथ, प्यार  से  सजनी जब से।

रणवीर 'अनुपम'
17.12.2017
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