Sunday, December 10, 2017

461. जिधर देखिए उधर (रोला)

461. जिधर देखिए उधर (रोला)

जिधर  देखिए उधर  चुनावों  की  सरगर्मी।
मजे  कर  रहे   चोर  उचक्के  दुष्ट  कुकर्मी।
गमछा   डाले   मूँछ    ऐठते   हैं   मुछमुंडे।
कारों  पर  चल  रहे   हाथ  ले  लाठी  डंडे।

धमकाते  फिर   रहे  वोट  हमको  ही  देना।
इधर-उधर जो किया सोच फिर मन में लेना।
हमरी   है  सरकार   फाड़   डालेंगे  तुमको।
सैयां  हैं  कुतवाल  कौन  सा डर  है हमको।

कहीं  राम का नाम कहीं  पर सीडी  बँटतीं।
कहीं जाँच की बात कहीं पर फ़ाइल छँटतीं।
कहीं पे औरँगजेब  कहीं पर मस्जिद-मंदिर।
"नीच" शब्द  के संग  कहीं पर  कोई अय्यर।

रोटी  कपड़ा  दवा  हवा  की  बात  न करते।
इन  पर  चर्चा  करने  से   सब   नेता  डरते।
भूख   गरीबी   मँहगाई   की  जात न  होती।
इसीलिए  इन सब  पर  कोई  बात न  होती।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
10.12.2017
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