Monday, December 11, 2017

463. दारू पीकर टुन्न चुहा (रोला)

463. दारू पीकर टुन्न चुहा (रोला)

दारू  पीकर   टुन्न   चुहा   ठेके   से   निकला।
झूम  रहा   था  तभी   पैर  नाली  में  फिसला।
लिसा-पुता चल दिया नदी के ढिंग जब आया।
गज  का शावक  देख  नदी  में  वह चिल्लाया।

बाहर   कढ़  बदमाश   कर  दिया  गंदा  पानी।
अभी   तोड़ता   तुझे   याद   करवाता   नानी।
शावक बाहर  निकल  सकपका डरकर बोला।
श्रीमन  क्या  हो गया दास  तो  है अति भोला।

शावक  को  लख  कहा  अरे ओ  भोले-भाले।
और  जोर  से   हँसा   कहा  जा  और  नहाले।
असल  बात  है  यार   खो  गया  मेरा  कच्छा।
तूने  पहना  नहीं   जानकर   लगा  ये'  अच्छा।

रणवीर सिंह "अनुपम"
10.12.2017
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