Tuesday, December 05, 2017

456. "निशा" संग में सोत हो (कुण्डलिया)

456. "निशा" संग में सोत हो (कुण्डलिया)

"निशा"  संग  में   सोत  हो,  उठते  "ऊषा"  साथ।
भोर  होय  बाहर  कढ़ो, पकड़ "किरन" का  हाथ।
पकड़ "किरन" का हाथ, "प्रभा" को लखो निहारो।
और  "रोशनी"  संग,  खुशी   से   दिवस   गुजारो।
"संध्या"   कहे   रिसाय,   नाथ  अब  रहो  ढंग  में।
हम  पाँचौ  को  छोड़,  सोत  तुम "निशा"  संग में।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
04.12.2017
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रिसाय - गुस्सा होकर

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