कुण्डलिया
पायल! वर्षों बाद अब, मिला सजन का साथ।
चुप हो जा ओ बावली, जोड़ूँ तेरे हाथ।
जोड़ूँ तेरे हाथ, अरे क्यों शोर करत है।
लोक लाज की सोच, धीर क्यों नाहिं धरत है।
पर पायल मदमस्त, पैर कर दीने घायल।
सजन छुएंगे आज, सोचकर पगली पायल।।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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