जा तन प्रेम न ऊपजे, सो तन है बेकार।
प्रेम बिना सब खोखला, मृदु वाणी, व्यवहार।
मृदु वाणी, व्यवहार, प्रेम बिन जन्में किसमें?
वे ही रिश्ते चलें, प्रेम हो बसता जिसमें।
प्रेम जगत का सार, शेष सब आवन-जावन।
वो तन हैं पाषाण, प्रेम नहिं भीतर जा तन।
प्रेम बिना सब खोखला, मृदु वाणी, व्यवहार।
मृदु वाणी, व्यवहार, प्रेम बिन जन्में किसमें?
वे ही रिश्ते चलें, प्रेम हो बसता जिसमें।
प्रेम जगत का सार, शेष सब आवन-जावन।
वो तन हैं पाषाण, प्रेम नहिं भीतर जा तन।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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