Saturday, April 13, 2019

753. तुमको मंदिर-मस्जिद प्रिय हैं (मुक्तक)

753. तुमको मंदिर-मस्जिद प्रिय हैं (मुक्तक)

तुमको मंदिर-मस्जिद प्रिय हैं, बड़े शौक से जाओ तुम।
तुमको भजन  कीर्तन  गाना, रोका किसने गाओ तुम।
लेकिन इससे लाभ किसे है, सोचो, समझो, मनन करो।
इसीलिए   कहता   रहता  हूँ, थोड़ी  अक्ल लगाओ तुम।

जिसको मंदिर-मस्जिद प्रिय हैं, बड़े शौक से जाए वो।
जिसको भजन  कीर्तन  गाना, रोका किसने  गाए वो।
थोड़ी अक्ल  लगाकर देखे, इससे किसको  लाभ हुआ।
स्वयं समझ ले  यही  बहुत है, मुझको ना समझाए वो।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
13.04.2019
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