Monday, November 26, 2018

654. बंद उर के इन पटों को (मुक्तक)

654. बंद उर के इन पटों को (मुक्तक)

बंद उर  के इन पटों को  खटखटाता कौन है?
बेहताशा   हसरतें  मन   में  जगाता  कौन है?
कौन है जो बिन बुलाए आ धमकता द्वार पर?
नित नये सपने दिखाकर लौट जाता कौन है?

रणवीर सिंह 'अनुपम'
26.11.2018
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