Thursday, November 12, 2015

136. सदा अपनी हथेली पर

सदा अपनी हथेली पर  मैं'  अपने  प्रान  रखता हूँ।
हमेशा हिंद की खातिर, ये' जिस्मो-जान  रखता हूँ।
अरे  औकात   क्या  तेरी,  करे  जो   सामना  मेरा।
जो'  सीखा हूँ बड़ों से मैं,  उसी का मान रखता हूँ।।
रणवीर सिंह (अनुपम)
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