Monday, June 26, 2017

370. खुश रहो आप सब (जलहरण घनाक्षरी)

370. खुश रहो आप सब (जलहरण घनाक्षरी)

खुश रहो  आप  सब, खाओ  घी  पनीर  दूध,
दिन में  हमें  भी एक, बार  दाल-भात  मिले।

ऊँचे-ऊँचे  महलों  का,  हमको  विरोध  नहीं,
टूटी हुई  झोपड़ी  से, हमें  भी  निजात मिले।

कौड़ियों में  हरिया की, बिके न  जमीन अब,
और काहू  हलकू को, पूस की ना रात मिले।

तुम  पे  भरोसा  कर,  हमने   चुना   है  तुम्हें,
हमको ही काहे  गोली, डंडा, हवालात मिले।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
26.06.2016
*****

No comments:

Post a Comment

Note: Only a member of this blog may post a comment.