370. खुश रहो आप सब (जलहरण घनाक्षरी)
खुश रहो आप सब, खाओ घी पनीर दूध,
दिन में हमें भी एक, बार दाल-भात मिले।
ऊँचे-ऊँचे महलों का, हमको विरोध नहीं,
टूटी हुई झोपड़ी से, हमें भी निजात मिले।
कौड़ियों में हरिया की, बिके न जमीन अब,
और काहू हलकू को, पूस की ना रात मिले।
तुम पे भरोसा कर, हमने चुना है तुम्हें,
हमको ही काहे गोली, डंडा, हवालात मिले।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
26.06.2016
*****
No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.