728. पौआ चार चढ़ाय के (कुंडलिया)
पौआ चार चढ़ाय के, दोनों भुजा उछाल।
घीसू गामा सामने, ठोंक रहा है ताल।
ठोंक रहा है ताल, किसी से नहीं सँभलता।
वश में है नहिं गात, गिरे फिर उठकर चलता।
नाली में है पड़ा, उड़ रहे सिर पर कौआ।
लाखों घीसू गिरैं, कीच में पी-पी पौआ।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
17.03.2019
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