Thursday, August 01, 2019

818. यह कैसा रामराज्य भाई? (गीत)

818. यह कैसा रामराज्य भाई? (गीत)

यह कैसा रामराज्य भाई?

मर जाते है शिशु तड़प-तड़प, कोई भी जिम्मेदार नहीं।
लगता गरीब के बच्चों को, जीने का है अधिकार नहीं।
केवल वोटों की चिंता है, जनता की कोई फिक्र नहीं।
अफसोस नहीं कुछ लाज नहीं, निज नाकामी का  जिक्र नहीं।
इनके चहरे हैं लाल-लाल, हमरे चहरों पर मुर्दाई।


हैं कई मुज्जफरनगर यहाँ, कितने ही हैं कन्नौज यहाँ।
बच्चियाँ नोचकर खा जाते, ऐसे गिद्धों की  फौज यहाँ।
जिस जगह दबी होंगी लाशें, ऐसे तो कई ठौर होंगे।
इस रामराज में ना जाने, कितने उन्नाव और होंगे।
जिस जगह कई मक्कारों ने, अस्मत होगी नोची खाई।


भारत माता की जय-जयकर, सड़कों पर झुंड उतर आते।
जिसने भी आनाकानी की, तो पकड़ उसे सब लठियाते।
हर लड़की इन्हें लगे गुंडी, हर लड़का है मजनूं लगता।
ज्योंही कोई जोड़ा देखें, अंतर का क्रोध फूट पड़ता।
झंडा-डंडा ले हाथ आज, गुंडों की नई फौज आई।


रणवीर सिंह 'अनुपम'
01.08.2019
*****

No comments:

Post a Comment

Note: Only a member of this blog may post a comment.