821. तन पीत वसन में लिपटा है (मुक्तक)
तन पीत वसन में लिपटा है, कंचन-सी काया दमक रही।
अधरन पर मधुरिम हास सजे, दतियन में दामिन चमक रही।
साँसों से सुगंधित पवन बहे, चहुँदिश मलयज-सी गमक रही।
कुछ दूर सफलता स्वागत को, अपने कदमों को धमक रही।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
03.08.2019
*****
No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.