Saturday, August 03, 2019

821. तन पीत वसन में लिपटा है (मुक्तक)

821. तन पीत वसन में लिपटा है (मुक्तक)

तन पीत वसन में लिपटा है, कंचन-सी काया दमक रही।
अधरन पर मधुरिम हास सजे, दतियन में दामिन चमक रही।
साँसों से सुगंधित पवन बहे, चहुँदिश मलयज-सी गमक रही।
कुछ दूर सफलता स्वागत को, अपने कदमों को धमक रही।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
03.08.2019
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