Sunday, June 10, 2018

561. शबाब शोखियों का (मुक्तक)

561. शबाब शोखियों का (मुक्तक)

सुरूर, शोखियों का  दीखे रंग चेहरे पे।
शबाब-ए-सिंधु में उठती तरंग चहरे पे।
नजर से  बोलिये  ऐसे न पक्षपात करे।
लगे है डर कि न हो जाय जंग चेहरे पे।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
10.06.2018
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561. शबाब शोखियों का (मुक्तक)

शबाब  शोखियों   का  दीखे  रंग  चेहरे पे।
रूप  के  सिंधु  में  उठती   तरंग  चहरे  पे।
नजर से  भूल के थोड़ा भी पक्षपात हुआ।
हमें  है डर  कि  न हो जाय  जंग चेहरे  पे।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
10.06.2018
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