443. प्रेम जो दिल में उमड़ता (मुक्तक)
प्रेम जो दिल में उमड़ता, तो उमड़ने दीजिए।
गर उफानें मारता है, तो उफनने दीजिए।
आरजू मैंने बता दी, आपको अपनी सनम।
आप भी उदगार दिल के, अब निकलने दीजिए।
गर उफानें मारता है, तो उफनने दीजिए।
आरजू मैंने बता दी, आपको अपनी सनम।
आप भी उदगार दिल के, अब निकलने दीजिए।
आपकी ही कामना है, प्रार्थना सुन लीजिए।
आप पर ही छोड़ता हूँ, जो समझिए कीजिए।
आज भी वो ही तड़फ है, आज भी वो ही जुनूँ।
चाह अब भी हाथ की है, लीजिए या दीजिए।
आप पर ही छोड़ता हूँ, जो समझिए कीजिए।
आज भी वो ही तड़फ है, आज भी वो ही जुनूँ।
चाह अब भी हाथ की है, लीजिए या दीजिए।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
11.11.2017
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11.11.2017
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