Friday, March 18, 2016

228. गोरी दर्पण सामने (कुण्डलिया)

कुण्डलिया

गोरी, गोरी  देह  का,  बैठ   करे   श्रृंगार।

कंचन झुमका हाथ ले, रही कान में डार।

रही कान में डार, सजे अधरों पर लाली।

काले-काले केश, सुरमयी  आँखें काली।

दिखे फूल सी जवां, लगे  है कोरी-कोरी।

नजर  पड़े  कुम्लाह,  देह  ये  गोरो-गोरी।

रणवीर सिंह (अनुपम)

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