409. तेरे मन का यह मौन प्रिये (मुक्तक)
तेरे मन का यह मौन प्रिये, हिरदय की बातें बोल रहा।
अंतर के बंद कपाटों को, खटका-खटकाकर खोल रहा।
बिंदी, नथनी, कंगन, चूड़ी, पायल उर में उत्साह भरे।
दूधिया देह खामोश नज़र, लखकर अंतर्मन डोल रहा।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
05.09.2017
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