Tuesday, September 05, 2017

409. तेरे मन का यह मौन प्रिये (मुक्तक)

409. तेरे मन का यह मौन प्रिये (मुक्तक)

तेरे मन का  यह मौन प्रिये, हिरदय की  बातें  बोल रहा।
अंतर के बंद कपाटों को, खटका-खटकाकर खोल रहा।
बिंदी, नथनी,  कंगन, चूड़ी, पायल  उर  में  उत्साह भरे।
दूधिया देह  खामोश  नज़र, लखकर अंतर्मन डोल रहा।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
05.09.2017
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