Saturday, May 06, 2017

338. पीछे से तेरा वार भी (गजल)

पीछे  से  तेरा  वार  भी  भरपूर  नहीं  है।
हारा  हूँ  मगर  हौसला  ये  चूर  नहीं  है।

हर  धर्म  जाति   देश  में   मौजूद  सूरमा,
दुनिया में  सिर्फ  एक  तू  ही शूर नहीं है।

जनता पे  जुल्म  हुये  हैं हर एक  दौर में,
चाहे  तू  बदल  दे   इसे   दस्तूर  नहीं  है।

अपने  गुरूर पर तुझे  इतना  गुरूर क्यों,
तू  भी  है  एक  नार  कोई   हूर  नहीं  है।

तेरी  मुहब्बतों  को  सँभाले,  हुये  है  जो,
ये  शख्स  तेरा  यार  है, मजदूर  नहीं है।

माना  कि  घर  में  हैं  तेरे  सारी  सहूलतें,
कैदी   की  मगर  जिंदगी  मंजूर  नहीं है।

होगा  तू  खरीदार  इस  सारे जहान  का,
बिकने  को  मेरी लेखनी मजबूर नहीं है।

आया है जब से तू यहाँ ऊधम मचा हुआ,
तेरा  पतन  भी  यार  अधिक  दूर नहीं है।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
06.05.2017
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