Wednesday, June 26, 2019

782. साजन से परमानंद दिया (मुक्तक)

782. साजन से परमानंद दिया (मुक्तक)

साजन ने परमानंद दिया, बदले में सारी शर्म लई  है।
मन में  कुछ भी अफसोस  नहीं, क्या  चीज मिली क्या चीज गई है।
जब से पिय से संपर्क  हुआ, मम देह  सखी कुंदन सी भई है।
उत्साह नया, जज़्बात नए, अनुभूति नई हर बात नई है।

पिय से सखि परमानंद मिला, बदले में सारी शर्म गई  है।
मन  में  कुछ भी  अफसोस नहीं, क्या चीज मिली क्या चीज दई है।
जब से  उनसे  संपर्क  हुआ, मम देह  सखी कुंदन सी भई है
उत्साह नया, जज़्बात नए, अनुभूति नई हर बात नई है।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
26.06.2019
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