Saturday, June 25, 2016

258. धरती पानी के बिना (कुण्डलिया)

कुण्डलिया

धरती   पानी   के   बिना,  सूख    हुई   बेहाल।
त्राहि त्राहि सब कर रहे, चहुँदिश पड़ा अकाल।
चहुँदिश   पड़ा  अकाल,  अरे  आ   वर्षा  रानी।
प्यासे  जो  मर   रहे,   इन्हें   दे   तू   जिंदगानी।
देख  तुझे   हुंकार   जिंदगी   फिर   से   भरती।
पा    तेरा   सानिध्य,   लहलहा  उठती   धरती।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
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