552. दारू पीकर मर रहे (कुण्डलिया)
दारू पीकर मर रहे, निर्धन अनपढ़ लोग।
प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, यह चौतरफा रोग।
यह चौतरफा रोग, दिखाई हल नहिं देता।
नागफाँस-सा जकड़, प्राण पल में ले लेता।
पी-पीकर नौजवां, हो गए सूखे कीकर।
मरें सैकड़ों रोज, विष भरी दारू पीकर।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
22.05.2018
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