Saturday, November 02, 2019
840. कंडा-सी सुलगत है (मुक्तक)
Sunday, September 29, 2019
839. उनको केवल याद हैं (कुंडलिया)
839. उनको केवल याद हैं (कुंडलिया)
अगर आज शहीदों की बात करें तो आज के तथाकथित देशभक्तों की जिव्या पर तीन-चार ही नाम दिखते हैं। जब स्वतंत्रता की लड़ाई में शहीद हुए कुछ वीर और वीरांगनाओं को ही याद किया जाएगा, तब उनकी सोच पर पक्षपात का प्रश्नचिन्ह तो लगेगा ही। इसी पर मेरी एक कुंडलिया छंद।
उनको केवल याद हैं, भगत सिंह आजाद।
और साल में एक दिन, कर लेते हैं याद।
कर लेते हैं याद, एक थी लक्ष्मीबाई।
किन्तु याद ना उन्हें, मरी झलकारीबाई।
भूले, सुंदर, उषा, कहूँ क्या इस अवगुन को।
नहीं मुंदरी याद, अजीजन याद न उनको।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
29.09.2019
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सुंदरबाई, मंदरबाई, मुंदरीबाई, ऊषाबाई, मोतीबाई, अजीजनबाई, ये सब वे वीरांगनाएं हैं जिन्होंने अपने अपने इलाके में अंग्रेजी सेना से लोहा लिया और वीरगति को प्राप्त हुईं। इन जैसी सैकड़ों वीरांगनाओं और वीरों के बलिदान को एक साजिश के तहत छुपाकर रखा गया ताकि चंद लोगों को महिमामंडित किया जा सके।
Sunday, September 15, 2019
836. यूपी की इस पुलिस से (कुंडलिया)
836. यूपी की इस पुलिस से (कुंडलिया)
13.09.2019 को सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश में एक सब इंस्पेक्टर, वीरेंद्र मिश्रा और एक कांस्टेबल महेंद्र प्रसाद द्वारा एक युवक की तालवानी अंदाज में उसके छोटे-से भतीजे के सामने बेहरमी से पिटाई की और उसकी रीढ़ की हड्डी, गर्दन की हड्डी तोड़ने की कोशिश की गई। यही नहीं उसके पैर पकड़कर उसे चीरकर मार डालने की कोशिश की गई। निर्दयी और बहसी पुलिस वालों ने उसकी जान लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह उसकी किस्मत थी कि वह बच गया।
इसके बाद जब वीडियो वायरल हुआ और NDTV ने इसे दिखाया तब दोनों पुलिसवालों के खिलाफ धारा 307 में FIR दर्ज की गई।
अब प्रश्न यह है कि जिस बच्चे ने यह सब देखा है वह कैसे विश्वास करेगा कि पुलिस जनता की दोस्त होती है। क्या वह भविष्य में मदद के लिए पुलिस के पास जाने की सोचेगा?
यह कोई पहली घटना नहीं है। ऐसी बर्बरतापूर्ण घटनाएं रोज हो रहीं हैं। जिसमें से बहुत तो प्रकाश में भी नहीं आतीं। ये ज्यादातर गरीब, कमजोर लोगों के खिलाफ होतीं हैं।
यूपी की इस पुलिस से, सभी रहो हुशियार।
ना जाने कब ठोंक दे, कब दे किसको मार।
कब दे किसको मार, तोड़ दे हड्डी पसली।
कुछ भी है नहिं झूठ, बात है पूरी असली।
जैसे हो सरकार, यहाँ इनकी फूफी की।
सावधान हुशियार, पुलिस है यह यूपी की।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
15.09.2019
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835. सूर सूर तुलसी शशी (एक प्रश्न)
हिंदी दिवस पर
835. सूर सूर तुलसी शशी (एक प्रश्न)
"सूर सूर तुलसी शशी, उडगन केशवदास।
अब के कवि खद्योत सम, जहँ-तहँ करत प्रकाश।"
अगर हम यह कहकर कुछ कवियों को मुकुट बनाकर शीश पर सजाने की बात करें और शेष को धूलि के बराबर महत्व दें तब हमारी बात पर कैसे और कितना भरोसा किया जाय, यह एक विचारणीय प्रश्न है। क्या इन्हीं तीन कवियों को पढ़कर लोक-कल्याण और हिंदी का उत्थान हो सकता है।
अगर ये ही तीन लोग मानव जाति के लिए प्रदीप्त स्तंभ हैं, तो फिर
"आचार्य हजारी प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, महावीर प्रसाद, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' सच्चिदानंद हीरानंद, महादेवी वर्मा, मैथलीशरण, सुमित्रानंदन प्रेमचंद, रामधारी सिंह दिनकर, कबीरदास, रहीमदास, अयोध्यासिंह उपाध्याय, अज्ञेय, आचार्य चतुरसेन आदि सारे के सारे हिंदी कवि और लेखक जुगनूं ही हैं।" क्या इसे सच माना जा सकता है?
हाय द्वेष तू जो भी कराए वह कम है।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
14.09.2019
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Tuesday, September 10, 2019
834. उन ग्रंथों में है क्या धरा (मुक्तक)
834. उन ग्रंथों में कुछ नहीं धरा (मुक्तक)
उन ग्रंथों में कुछ नहीं धरा, जो ऊँचनीच की बात करें।
जो चतुर्वर्ण के पोषक हैं, जो छुआछूत की बात करें।
जो एक को ईश्वर सम मानें, जो एक को पशु से भी बदतर,
जो मानवता का दम्भ भरें, जो दानवता की बात करें।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
19.09.2019
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Monday, September 02, 2019
833. पनघट पीपल से कहे (कुण्डलिया)
833. पनघट पीपल से कहे (कुण्डलिया)
पनघट, पीपल से कहे, बदल गये हैं गाँव।
मैं भी जर्जर हो चुका, बची न तुझमें छाँव।
बची न तुझमें छाँव, जरा का रोग लगा है।
यौवन के सब मीत, वृद्ध का कौन सगा है।
कहाँ नारियाँ दिखे, शीश पर दिखे कहाँ घट।
पायल चूड़ी बिना, आज सूना यह पनघट।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
02.09.2019
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Monday, August 26, 2019
832. जीवन भर जूझत रहा (कुंडलिया)
832. जीवन भर जूझत रहा (कुंडलिया)
जीवन भर जूझत रहा, लेकर खाली पेट।
मरते लाखों का हुआ, उसके शव का रेट।
उसके शव का रेट, लगाते नाच-नाचकर।
किसने कितना दिया, बताते बाँच-बाँचकर।
घड़ियाली ले अश्रु, करें परिक्रमा तन-तन।
कैसी है यह मौत, हाय यह कैसा जीवन।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
26.08.2019
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