Saturday, May 25, 2019

771. गाँधी जी गायब हुए (कुंडलिया)

771. गाँधी जी गायब हुए (कुंडलिया)

गाँधी  जी  गायब  हुए, जय - जय  नाथूराम।
जिससे भी जब लाभ हो, उसका लीजे नाम।
उसका लीजे नाम, स्वार्थ को सिद्ध  करे जो।
उन्हें  रोज गरिआउ, देशहित  हाय  मरे  जो।
इधर-उधर  चहुँओर, चले  हिंसा  की आँधी।
जय  हो  नाथूराम, कर  दिए  गायब  गाँधी।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
25.05.2019
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771. गाँधी जी गायब हुए (कुंडलिया)

गाँधी  जी   गायब   हुए, जय-जय  नाथूराम।
जिससे भी जब लाभ हो, उसका लीजे नाम।
उसका लीजे नाम, स्वार्थ को  सिद्ध करे जो।
उसमें   ढूँढ़ों   वोट, देशहित  रोज   मरे  जो।
मारकाट छल-छंद, चली  हिंसा  की   आँधी।
जय  हो   नाथूराम, कर  दिए  गायब  गाँधी।

रणवीर सिंह 'अनुपम'
25.05.2019
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