771. गाँधी जी गायब हुए (कुंडलिया)
गाँधी जी गायब हुए, जय - जय नाथूराम।
जिससे भी जब लाभ हो, उसका लीजे नाम।
उसका लीजे नाम, स्वार्थ को सिद्ध करे जो।
उन्हें रोज गरिआउ, देशहित हाय मरे जो।
इधर-उधर चहुँओर, चले हिंसा की आँधी।
जय हो नाथूराम, कर दिए गायब गाँधी।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
25.05.2019
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771. गाँधी जी गायब हुए (कुंडलिया)
गाँधी जी गायब हुए, जय-जय नाथूराम।
जिससे भी जब लाभ हो, उसका लीजे नाम।
उसका लीजे नाम, स्वार्थ को सिद्ध करे जो।
उसमें ढूँढ़ों वोट, देशहित रोज मरे जो।
मारकाट छल-छंद, चली हिंसा की आँधी।
जय हो नाथूराम, कर दिए गायब गाँधी।
रणवीर सिंह 'अनुपम'
25.05.2019
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